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‘थर्ड हेवन’
क्या होता यदि मनुष्य इतिहास के सारे दिवंगत महानतम लोग वास्तव में कभी विलुप्त ही न हुए होते? क्या होता यदि मृत्यु के बाद वे सभी स्वयं को एक ऐसी जगह पाते जहां सोच कभी क्षीण ही नहीं पड़ती? और क्या होता यदि आपको ऐसा अवसर मिलता कि आप हर क्षेत्र के महानायकों से रू-ब-रू हो सकते?
‘थर्ड हेवन’ दीप त्रिवेदी की एक ऐसी किताब है जो आपको गहराई से सोचने पर मजबूर करती है और जिसमें गंभीर एवं अर्थपूर्ण विचार हैं। जिन्होंने ‘मैं मन हूँ’, ‘मैं कृष्ण हूँ’, ‘मैं गीता हूँ’ तथा ‘सबकुछ सायकोलॉजी है’ जैसी बेस्टसेलर किताबें लिखी हैं। इस किताब में लेखक एक अद्भुत दुनिया की कल्पना करते हैं।
जहां आइन्स्टाइन ब्रह्मांड के रहस्यों पर से परदा उठा रहे हैं और सोक्रेटीस सबसे हर बात पर बहस कर रहे हैं। यहाँ क्राइस्ट और कृष्ण इस पूरे अस्तित्व के मूल उद्देश्य को समझा रहे हैं, तो बुद्ध शून्य में वह सब निहार रहे हैं जो अन्य कोई नहीं देख सकता।
वॉल्ट डिज्नी ऐसी दुनिया का सपना बुन रहे हैं जो कल्पना से भी अधिक जीवंत है, और रूमी, गालिब, खलील जिब्रान जैसे कवि एवं दार्शनिक हवा में ही भावनाओं को घोल दे रहे हैं।
लेकिन यह कोई शाश्वत विश्राम की जगह नहीं है।
इस थर्ड हेवन में आधुनिक खयालात और प्राचीन दर्शन अक्सर टकराते हैं और रह-रहकर तीखे वाद-विवाद पैदा करते हैं। मानव इतिहास के सर्वश्रेष्ठ जीनियस आइन्स्टाइन टाइम-ट्रैवल के माध्यम से समझाते हैं कि कैसे फिर से महाभारत युग में पहुंचा जा सकता है ताकि कृष्ण को गीता कहते हुए लाइव देखा जा सके।
वहीं लियोनार्दो दा विंची हैं जो निकोला टेस्ला, स्टीव जॉब्स, एडीसन, हेनरी फोर्ड तथा अन्य विजनरीज को एकत्र करके अत्यंत ज्वलंत प्रश्न खड़ा करते हैं कि आज के युवाओं को श्रेष्ठ जीवन जीने के लिए वास्तव में क्या आवश्यक है?
और इन सभी के केंद्र में स्थित है, एक अति शक्तिशाली एआई–संचालित क्वांटम कम्प्यूटर जो मन, जीवन और ब्रह्मांड से संबंधित हर सवाल के सटीक जवाब दे रहा है।
यहां सदियों से पूछे जा रहे ब्रह्मांड से लेकर जीवन तक के गहरे सवालों के जवाब उपलब्ध हैं, लेकिन क्या आप उन उत्तरों को जानने हेतु बेकरार हैं?
तो देर किस बात की!!!
थर्ड हेवन आइए और इस अनोखी, अद्भुत एवं रोचक कहानी से खुद जानिए!!!
यह किताब हिंदी, अंग्रेजी और गुजराती में सभी प्रमुख बुकस्टोर्स और ई-कॉमर्स साइट्स पर उपलब्ध है।

